उद्देश्य

उद्देश्य:

जीवन के प्रत्येक क्षण में कहानी समाई हुई है। ऐसा एक पल भी नहीं है जब कोई कहानी का निर्माण न होता हो। वर्तमान जब बिता हुआ भूतकाल में तब्दील हो जाता है तो एक स्वतः कहानी का निर्माण हो जाता है। यूं कहें तो जीवनकाल के प्रतिक्षण प्रत्येक व्यक्ति एक कहानी से गुजरता है।
कहानी का हमारे जीवन से गहरा तालुक है। कहानियाँ जब प्रेरक, मार्गदर्शक, पथ प्रदर्शक बन जाये तो जीवन मे आने वाला भविष्यकाल का निर्माण सजगतापूर्वक सुगम हो जाता है। और कुछ ऐसे भी अनुचित घटे घटनाओं की कहानियाँ भी हमे सत्य धर्म के मार्ग अनुसरण का बोध कराती है जिससे अज्ञानतावश होने वाली गलतियों के प्रति हम पहले से ही सावधान, होशियार हो जाते है। कहानियाँ साबुन की तरह होती है जो मन मे बैठे अज्ञानता के गंदगी को साफ कर देते है। प्रत्येक व्यक्ति को कहानी/किताब पढ़ना चाहिए तथा कहानी लिखना चाहिये। संविधान निर्माता बाबा साहेब अंबेडकर जी को किताबे पढ़ने-लिखने का बड़ा शौख था उन्होंने पूरे उम्र किताबे पढ़े तथा लिखें, उनको जब भी समय मिलता किताबे पढ़ते व्यर्थ का समय न बर्बाद करते।

कथाकार, कवि समाज का आईना होता है। आज के परिवेश में हिंदी साहित्य लेखन का कार्य मंद पड़ने लगा है, कथाकार, लेखक की संख्या दिन-प्रतिदिन कम होती चली जा रही है ऐसे में आजमगढ़ के ठेकमा ब्लॉक के ब्लॉक मिशन प्रबंधक श्री अभिषेक कुमार जो एक युवा एवं उभरते हुए कथाकार, साहित्यकार, तथा प्राकृत प्रेमी, पर्यावरण संतुलन के रचनाकार हैं। इनकी रचनाओं में एक दिव्य प्रेरक कहानियों का समागम है जो किसी भी अवचेतन मन को एक नवीन संचेतना अभूतपूर्व मन की गहराइयों में उमंग, उत्साह नवीन चेतना से परिप्लावित कर देता है।
आध्यात्मिक, आर्थिक,सामाजिक, बौद्धिक, जीव-जंतु, प्रकृत एवं पर्यावरण संतुलन संबंधी पहलुओं से जुड़ी तथ्यों को लेखांकन का उद्देश्य जनमानस को आत्मीयता/मानवता के सर्वोच्च बिंदु पर पथ प्रदर्शक करना है।

एक उद्देश्य यह भी है की समाज के अनाथ, उपेक्षित, मुख्य धारा से पिछड़े हुए अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े एवं सामान्य, निर्बल वर्ग के सभी नागरिकों को आर्थिक, सामाजिक, बौद्धिक, शैक्षणिक, चारित्रिक एवं अध्यात्मिक उत्थान हेतु कार्य करना, समाज में व्याप्त छुआछुत एवं उंच-नीच का भेद-भाव मिटाकर सामाजिक समरसता एवं राष्ट्रीय एकता की भावना का बिकास करना, एवं समाज के बालक, बालिका, महिला, युवा, बयोबृद्ध,परित्यक्ता एवं अनाथ मातृशक्ति के सहायतार्थ उपयोगी एवं कल्याणकारी कार्य मिल कर किया जाए तथा वैसे व्यक्ति जो जरूरतमंद है जिन्हें दरकार है सहारा, सहयोग, मार्गदर्शन की उन्हें हम भौतिक रूप से एवं ज्ञान विवेक का संचार उनके रगों में भर के उनको स्वालंबी, आत्मनिर्भर किया जा सके।