शहादत वीरांगना मणिकर्णिका की

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ब्लॉग प्रेषक: Sneh Singh
पद/पेशा: Freelance content writer
प्रेषण दिनांक: 05-01-2026
उम्र: XX
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शहादत वीरांगना मणिकर्णिका की

।। शहादत वीरांगना मणिकर्णिका की ।।

"" मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी का नारा देकर अंग्रेजी सल्तनत के खिलाफ वीरता का उद्घोष किया""

मेरे देश भारत की आजादी की गाथा त्याग, वीरता और बलिदान से सुसज्जित हैं इस अमर बलिदान की कहानी में अगर देश की खातिर प्राण न्योछावर करने की नामावली में वीरांगना मणिकर्णिका जिनका बचपन का नाम मनु था जिन्हें आज इतिहास"" रानी लक्ष्मीबाई ""के नाम से पुकारता हैं 

उनका जीवन नारी शक्ति,स्वाभिमान और राष्ट्र प्रेम का अद्भुत  स्पष्टीकरण हैं

जैसा कि सभी को ज्ञात हैं इनका जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था इनके बचपन का नाम मनु था उनकी माता का नाम भागीरथी बाई था पिता मोरोपंत तांबे पेशवा बाजीराव द्वितीय के दरबार में कार्यरत थे अपने बाल्यकाल से ही मनु तलवारबाजी,घुड़सवारी और धनुर्विद्या में पारंगत थी जो बालिका बचपन से ही खेल खेल में हथियारों से दोस्ती करने वाली थी आगे चलकर अंग्रेजी सत्ता के साम्राज्य को निस्तेनाबूत 

करने में ये मील का पत्थर साबित हुई

बाल्यका से यौनावस्था में प्रवेश के उपरांत सन् 1842 में इनका विवाह संस्कार झांसी के राजा गंगाधर राव से हुआ परिणय सूत्र में बंधने के उपरांत वो लक्ष्मीबाई कहलाने लगी विवाह के कुछ वर्षों के बीतने के बाद उनके जीवन में पुत्र का आगमन हुआ पर दुर्भाग्यवश उस पुत्र का निधन हो गया बाद में दत्तक पुत्र दामोदर राव को उनके राज्य का उत्तराधिकारी चुना गया

महाराज गंगाधर राव की मृत्यु के बाद 

लार्ड डलहौजी की "हड़प नीति"के तहत 

अंग्रेजों ने झांसी को हड़पने की कोशिश की । जिसका विरोध लक्ष्मी बाई ने कर युद्ध का विगुल फूंका

उन्होंने साबित किया कि महिलाएं भी युद्ध कौशल और नेतृत्व में पुरुषों से कम नहीं उन्होंने अपनी निजी सेना महिलाओं की बनाई और तोपखाने को मजबूत किया और महिला सशक्तिकरण का उदाहरण प्रस्तुत किया

1857 के विद्रोह में झांसी की रक्षा के लिए उन्होंने खुद मोर्चा संभाला 

उन्होंने अपने बच्चे दामोदर राव को पीठ पर बांधकर युद्ध किया और अंग्रेजों से बहादुरी से लड़ी जो उनकी अदम्य वीरता और देशभक्ति का प्रतीक हैं 

उनकी वीरता ने पूरे भारत को प्रेरित किया ब्रिटिश जरनल ह्यूग रोज ने उन्हें सबसे भारतीय नेता और एक मात्र मर्द कहा था जिससे उनकी बहादुरी का लोहा मान लिया गया 

उनके साहस ने पूरे देश को प्रेरित किया और सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता 

""खूब लड़ी मर्दानी वो तो झांसी वाली रानी थी"" ने उन्हें अमर बना दिया 

उन्होंने ""डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स""(व्यापगत नीति) के खिलाफ लंदन तक अपील की,भले ही वह असफल रही 

उनके बलिदान ने अन्य क्रांतिकारियों को स्वतंत्रता संग्राम में शामिल होने और लड़ने के लिए प्रेरित किया जिससे आंदोलन और मजबूत हुआ 

सिर्फ 29 साल की आयु में 1858 में ग्वालियर के पास कोटा की सराय में युद्ध के दौरान गोली लगने और तलवार के वार से वह गंभीर रूप से घायल हुई और वीरगति को प्राप्त हुई और उनकी शहादत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा दी और अनगिनत लोगों को आजादी के लिए लड़ने की प्रेरणा दी 

मणिकर्णिका ने अपनी बहादुरी ,नेतृत्व और बलिदान से न केवल झांसी के बचाया बल्कि पूरे देश को ब्रिटिश शासन के खिलाफ उठ खड़े होने और आजादी के लिए लड़ने की प्रेरणा दी जो उनके जीवन का सबसे बड़ा योगदान हैं

शहादत देने की सूची में आगे और भी वीर रहे हैं जिन्होंने अपने जीवन का लक्ष्य भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त करना था उनके नामों की सूची हैं 

महात्मा गांधी,भगत सिंह, सुखदेव थापर,श्रीराम राजगुरु ,सुभाष चंद्र बोस,जवाहर लाल नेहरू,सरदार बल्लभ भाई पटेल,चंद्र शेखर आजाद,लाला लाजपत राय,बाल गंगाधर तिलक ,डॉ भीमराव आंबेडकर,राम प्रसाद बिस्मिल,सरोजनी नायडू,मंगल पांडे , तात्या टोपे,नाना साहेब इत्यादि इत्यादि


पर आज के भारत  वासी और उनकी सोच कैसी हो गई हैं कि एक दूसरे के दुश्मन बने बैठे हैं किसी को आगे बढ़ते हुए देख नहीं सकते न ही किसी की तरक्की किसी को अच्छी लगती हैं 

जलन,ईर्ष्या की आग मन में लिए फिरते हैं जैसे एक दूजे के प्रतिद्वंदी हो  

और एक वो लोग थे जिन्होंने भारत माता की सेवा में अपने तन को शहादत की अग्नि में जला दिया न ही अपने परिवार की चिंता की ना घर बार की 

कितना फर्क हैं इन देशप्रेमी और उन स्वार्थी इंसानों की सोच में ??

""गांव का ऐतिहासिक मेला छोड़ आया हूं

मैं घर वालों को अकेला छोड़ आया हूं

वतन की हिफाजत को सरहद पर ही बसेरा हैं

वतन से बड़ा कोई परिवार नहीं

यहां क्या तेरा क्या मेरा हैं

दोस्तों का संग अलबेला छोड़ आया हूं

मैं घर वालों के अकेला छोड़ आया हूं

अकेला छोड़ आया हूं ""


स्नेहा सिंह 

फ्रीलांस कंटेंट राइटर 

कानपुर नगर, उत्तर प्रदेश

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