बारिश और पकोड़े

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ब्लॉग प्रेषक: डॉ विशाखा नरसिंह साने
पद/पेशा: शिक्षा
प्रेषण दिनांक: 12-10-2026
उम्र: 00
पता: Goa
मोबाइल नंबर: 000000000

बारिश और पकोड़े

बारिश और पकोड़े 

क्या नाता है बारिश और पकोड़ों का?बादलों ने आवाज़ दी, बादल छा गए,

अंदर से आवाज़ आई,आज पकोड़े मिल जाते तो कितना अच्छा होता।


बाहर ठंडी हवा और अंदर गरम गरम पकोड़े,

सोचकर ही मन ख़ुशी से झूम उठा।

बारिश भले देर से आए,पकोड़े तो बनने ही है।


क्या है बारिश और पकोड़ोंका रिश्ता।बारिश की बूंदे जैसे ही गिरने लगे, 

तैयारी होने लगी, बेसन और प्याज़ की ईज्जत बढ़ी।


बाहर बादलों ने  पड़घाम शुरू किया,

यहाँ पकोड़ों ने तेल में डुबकी लगाई।मौसम बन गया, और अंदर से फिर आवाज़ आई।

पकोड़ो के साथ गरमा गरम चाय हो जाए।


फिर क्या पकोड़ों के साथ चाय की तैयारी,

तो पकौड़े भी बनेंगे ही, तेल में पकौड़े।अब तो बारिश का आना और घरों में पकौड़ों का बनना।

ऐसे लगता है कि एक परंपरा सी बन गई है।


ना बने तो सब अधूरा सा लगता है।

बारिश के आने से मौसम ठंडा होता है,

और पकौड़ों के बनने से रिश्ते मज़बूत हो जाते है।

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