व्यंग/कटाक्ष
श्री मोबाइल कथा
श्रीहरि के वचन सुन नारद जी बोले कि उस मोबाइल में क्या होगा? और उसका प्रयोग क्या है? यह कौन कौन रखेगा ? इसमें क्या क्या होंगे? सभी कुछ विस्तार से बताएँ। नारद की बात सुनकर श्रीहरि बोले: दुख व शोक को दूर करने वाला यह सभी स्थानों पर आपको बुद्धिमान बनाने वाला
Read Moreपलायन - शौक या मजबूरी।
जब भी रुपए पैसे की जरूरत होती तो राष्ट्रवादी पार्टी और सेकुलर पार्टी में जिंदाबाद मुर्दाबाद करता, उसे दो चार रुपए की आमदनी हो जाती थी।
Read Moreबेटा नंबरी बाप सौ नंबरी। मासूम प्रेम पुजारी
ये मैं बड़ी आत्मीयता से बक सकता हूं की यदि हीर रांझा एक दूसरे से मिल गए होते तो हीर के साथ अगला नाम सोहनी के साथ होता और रांझा का महिवाल के साथ। मतलब साफ है की एक से दिल भरता कहां है। चाहे वो कोई भी हो। हम तो वो हैं जिन्हे सिर्फ एक भगवान पर नही बल्कि ....
Read Moreशिकारी वर्सेज तेंदुआ
काहे जी सियार जैसा काहे रेंक रहा है ? हां! गए थे दिशा फिरे, रहड़ जरा भी चरमरा रहा था तो निकला हुआ भी सटक जा रहा था, साला ई तेंदुआ जे न करा दे, पूरा पाचन खराब हो गया है, कुछ डर से, आऊ कुछ समय से पेट नही खाली करने से। डरिए मत, नवाब साहेब आ गए हैं,......
Read Moreभूत, भगवान और मैं।
भगवान और मैं। बोलते बोलते हार मान गए थे घरवाले की हनुमान चालीसा याद कर लो, जब भी डर लगे जोर जोर से उच्चारण करने लगना। लेकिन मैं निकम्मा आज तक विद्यालय में भी, हिंदी की कक्षा में पढ़ाई जाने वाली कविता में भी, सिर्फ "हवा हूं हवा, मैं बसंती हवा".........
Read Moreतू कैकई, मैं दसरथ।
शादी के वक्त सात वचन क्या दिया की वो अपने आप को कैकई और मुझे दशरथ समझने लगी। कैकई ने तो एक वचन राज्याभिषेक के लिए मांगा लेकिन मेरी वाली तो एकवचन को बहुवचन में शामिल कर, प्रतिदिन वचन की मांग करती है, ताकि मैं उसकी मांग पूरी करते करते मांग कर खाना शुरू कर..
Read Moreमुर्गा, खस्सी, मदिरा, नववर्ष और आंग्ल वर्ष के विरोधी।
जगत चचा का तोंद हजारों खस्सियों का कब्रगाह था, उनकी बांह भी चिकन सरीखा हो गई थी और तो और मुंह भी जमुनापारी नस्ल की बकरी से मिलने लगी थी, वो तो उनकी किस्मत थी की बकरी के शौकीनों की नजर उन पर नही पड़ी नही तो बेचारे कहीं मुंह दिखाने लायक नही रहते...
Read Moreसीरियल पगला देगा...
सीरियल के मुताबिक यहां हिंदुस्तान में हर आदमी अपने घर में तो बच्चे पैदा कर ही रहा है साथ में कई अन्य घरों में भी इनके योगदान में कोई कमी नहीं है।
Read Moreमुझ बेवड़ा की बात मत पूछो जी।
अब मैं दिन भर शाम का इंतजार करता ताकि दुःखी हो जाऊ और दोस्त सब मुझे दारू का भोग लगाए।अब रोज रोज मुझे विदेशी कौन पिलाता सो मैं मशालेदार पर उतर गया। पैसे कहां से आते थे - महाराज मुझे घर में ही चोरी करने की आदत पड़ गई। लेकिन मैने सिर्फ चोरी ही नही की बल्कि
Read Moreदर्द सहेंगे, कुछ ना कहेंगे, चुप ही रहेंगे हम, प्यार में तेरे सनम।
हूक-सी उठती है मन में– काश हम भी लिख पाते अपना दर्द, पर उस हूक को हम समझदारी से ज़बरियन दबा देते हैं। तब हमें अहसास होता है कि विद्रोह कैसे कुचले जाते होंगे।
Read Moreनर हो न निराश करो मन को।
भगवान मुझ जैसे मुजसम्मा को बनाने की क्या जरूरत थी। किस खास मकसद के लिए मुझे अवतरित किया प्रभु। अब तो लगता है की यदि कफन बेचने का धंधा भी करूं तो लोग मरना भी छोड़ देंगे।
Read More... अब मेरी उम्र हो गई है!🍁
उसने धीरे से हिलाया,और मेरी आंख खुल गई, नज़र सामने खड़ी मुस्का रही,पत्नी पे पड़ गई, हौले से वो बोली.."आपकी चाय ठंडी हो गई.!" "ओह..अच्छा"कह,चेतना जैसे सचेत हो गई! एक हाथ में ऐनक,दूजे में अख़बार लटक रहा था, अभी कुछ देर पहले ही तो,अख़बार पढ़ रहा था...
Read Moreक्योंकि शिक्षक भी कभी विद्यार्थी थे
मुझे प्रिंसिपल ने समझाया, देखिए इस विद्यालय के बच्चे बड़े बदमाश हैं, संभल कर रहना होगा। उदंडता की हद तक चले जाते हैं, कभी कभी बच के रहिएगा। मैने कहा आप मेरी फिक्र मत करो, अगर करना ही है तो उन सबों की करो। क्योंकि मैट्रिक के बाद पांच साल मैं उनसे ज्यादा शा
Read Moreदरवाजे से आते हैं, खिड़की से निकलते हैं
वैसे तो मेरा जन्म ही स्त्री उद्धार के लिए हुआ था, लेकिन उद्धार करने में कई बार मेरे शरीर का भी पुरजोर उद्धार किया नामाकुलों और नाकाम आशिकों ने मिल कर।
Read Moreउल्लू, राष्ट्र और गधा
लेकिन एक परेशानी थी की उल्लू जी महाराज सिर्फ रात को ही देख पाते थे, दिन के उजाले में उन्हें कुछ दिखाई नहीं पड़ता था। वैसे भी जो उजाले को नही देख पाते वो अंधेरे में सब कुछ देख लेते हैं।
Read Moreछेड़ू सिंह छेड़ा उर्फ मजनू भाई
करतूत तो मेरे पिता जी की भी वही थी इसलिए एक कहावत है न की " बापे पूत परापत घोड़ा, कुछ नही तो थोड़ा थोड़ा" असर तो आना ही था। का छेड़ा भाई सुने की कल ही जेल से बाहर आए। देखो हर कोई जे जनम लेता है ऊ किसी खास मकसद से ही इस मृत्युलोक में अवतरित होता है, और...
Read Moreमंगरू - छान उजाड़ विशेषज्ञ
मंगरू कोई साधारण प्राणी नही है और इस दुनिया में अकेला भी नही है। हर गली, हर मोहल्ले, हर जिले, हर राज्य और हर देश में मंगरू अपने जगह पर व्याप्त है। मंगरू बड़ा ही मृदभाषी, सौम्य, सुशिल और कोमल हृदय का स्वामी होता है। मंगरू के अंदर चिपकू नामक पदार्थ भरा होता
Read Moreजो बीत गया है वो पल न आएगा
हवा हूं हवा मैं बसंती हवा हूं" कविता जो केदारनाथ अग्रवाल द्वारा रचित थी वो उस समय हम सबों की प्रिय कविता हुआ करती थी, रात को लैंप या लालटेन की रोशनी में जोर जोर से इस कविता का पाठ करने में जो मजा आता था, शायद ही आज कल के बच्चे उस मजा को आत्मसात कर पाएंगे।
Read Moreलड़कों की बराबरी
प्रायः हमने कुछ लोगों को कहते हुए सुना है कि लड़का लड़की बराबर हैं वहीं कुछ लोग कहते हैं कि लड़कियाँ लड़कों की बराबरी कभी नहीं कर सकती |मुझे लगता है वो सही कहते हैं वो बराबरी करना नहीं चाहती | जहाँ तक मैं समझती हूँ तो वो किसी भी लड़के का पिछा कॉलेज से घर..
Read Moreबाल श्रम ही सहारा है..
इस छोटी सी उम्र में,काम क्यों करते हो.. खेलकूद को छोड़कर,मजदूरी क्यों करते हो! उन बच्चों की भांति,क्या खेल नहीं सुहाते.. उनकी तरह तुम भी..स्कूल क्यों नहीं जाते?! फीकी सी मुस्कान के साथ वो बोला.. मैंने पापा के आंसुओं को, ब...
Read Moreपूर्वजों को नमन
हम सभी पितृपक्ष में पूर्वजों,पित्ररों को नमन करते हैं, तर्पण, दान, श्राद्ध, पिंडदान और बहुत याद करते हैं, अपना कर्तव्य, परंपरा निभाते हैं। मगर क्या हम सचमुच पूरी ईमानदारी से ऐसा करते हैं? या महज औपचारिकता निभाते हैं? बड़ा विचारणीय प्रश्न है...
Read Moreचरण वंदन - कलयुगी रामबाण
मैने भी एक दिन गहन चिंतन किया, चिंतनोपरांत मुझे यह आभास हुआ की मुझमें चरण वंदन करने का अदभुद गुण बचपन से ही विद्यमान है। गहन चिंतन में हमने बचपन से ही चरण वंदन के द्वारा कई बार सीढ़ियों को चढ़ा और फिर कई बार धकिया के उतारा भी गया। ।
Read Moreगुप्तरोग - मन का रोग।
बाहुबली, बाहुबली यही ठीक है, लेकिन ठीक हो जायेंगे न। देखिए दवा के साथ दुआ की भी जरूरत है,इसलिए दो चार लोगों से दुआ भी करवाइए, और अगर दुआ देने वाले न मिलें तो दो चार रोगी मेरे पास लाइए हम ही दुआ दे देंगे।
Read Moreखुद के अधिकारों के लिए
हम तो कुछ भी कर सकते हैं अपने अधिकारों के लिए, नीति अनीति, न्याय अन्याय सही ग़लत, दंगा फसाद भी। क्योंकि ये तो हमारा अधिकार है, आपका कुछ नहीं है भाई, बेकार में मगजमारी न करो अपने नहीं सिर्फ हमारे अधिकारों की बात करो। क्या करोगे अपना अधिकार लेकर हमें ही...
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