| ब्लॉग प्रेषक: | आर. सी. यादव |
| पद/पेशा: | शिक्षक/मोटिवेशनल स्पीकर/ फ्रीलांस जर्नलिस्ट |
| प्रेषण दिनांक: | 24-04-2022 |
| उम्र: | 48 |
| पता: | Dobhi, Kerakat, Jaunpur, UP |
| मोबाइल नंबर: | 9818488852 |
रामधारी सिंह दिनकर
प्रबल लेखनी के सर्जक तुम
सुंदर शब्दों के शिल्पकार ।
'रेणुका' 'रसवन्ती' 'द्वंद्वगीत'
'कविश्री' की हुंकार ।।
'रश्मिरथी' की किरणों से
फैला चहुंओर उजाला ।
'कुरूक्षेत्र' की रणभेरी से
जग में फैली भीषण ज्वाला ।।
'सामधेनी' सामाजिक चिंतन
'हारे को हरिनाम' सहारा ।
भारतीय संस्कृति के परम पुरोधा
'धूप-छांव' से काव्य संवारा ।।
ग्राम्यांचल के मानस मोती
ओज पूर्ण सृजन के प्रेरक ।
'उर्वशी' का प्रेम प्रणय
'वट-पीपल' के सच्चे सेवक ।।
हिंदी के मूर्धन्य शिरोमणि
दीप जले अविचल अविराम ।
कथाकार ! हे काव्य शिल्पी !
श्रद्धा विनत प्रणाम ।।
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नए ब्लॉग पोस्ट
12-10-2026
पावन माँ गंगा का मानव जीवन के विभिन्न आयामों में महत्व।
महाराजा सगर ने एक बार अश्वमेघ यज्ञ करने का विचार किया और अश्वमेध का एक घोड़ा छोड़ा था। वह घोड़ा देवराज इंद्र ने चुरा लिया और महान ऋषि कपिल मुनि के आश्रम में उसे छुपा दिया। महाराजा सगर के 60,000 पुत्रों ने घोड़े को ढूंढते-ढूंढते महर्षि कपिल मुनि के आश्रम तक
Read More12-10-2026
बारिश और पकोड़े
क्या नाता है बारिश और पकोड़ों का?बादलों ने आवाज़ दी, बादल छा गए, अंदर से आवाज़ आई,आज पकोड़े मिल जाते तो कितना अच्छा होता। बाहर ठंडी हवा और अंदर गरम गरम पकोड़े, सोचकर ही मन ख़ुशी से झूम उठा। बारिश भले देर से आए,पकोड़े तो बनने ही है।
Read More10-10-2026
उत्तर-दक्षिण भारत संस्कृति मिलन एवं सम्मान समारोह का सफल समापन, 18 राज्यों की 72 विभूतियाँ सम्मानित
केरल के पलक्कड़ जिले स्थित हार्टफुलनेस स्पिरिचुअल रिट्रीट सेंटर, मलमपुझा में आयोजित चार दिवसीय मलयगिरि आध्यात्मिक चेतना शिविर सह उत्तर भारत-दक्षिण भारत संस्कृति मिलन एवं सम्मान समारोह का सफलतापूर्वक समापन हुआ। साहित्यकार डॉ. अभिषेक कुमार के नेतृत्व में...
Read More18-08-2026
स्पेशल 2029
अरे ई कौनो नई बात थोड़े है। गाँव-देहात से लेके फेसबुकिया शहर तक, हर जगहा अक्षय कुमार रूपी ठग अपना जाल बिछाए बैठा है। तनी सुनो। कुछ साल पहिले एक सिनेमा आया था, स्पेशल 26। उड़ी बाबा, का गजब का सिनेमा था। एक तो ठगों का गिरोह, ऊपर से धरम-करम ऐसा कि असली सीबीआई
Read More15-08-2026
मैं आजाद हूं।
मैं आजाद हूँ । गाँव के पूरब टोले में पीपल का पुराना ठूंठ आज फिर बहस की वेदी बना हुआ था। सिरकाही धूप में मधेसर चा अपनी पुरानी लाठी पर दोनों हाथ टिकाए, खंखारते हुए बोले, अरे भइया, हम तो कहते हैं कि देस में अजादी का बयार बह रहा है। अब देखो न, हमारे ज़माने
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