बरसात
बाल कहानी- बरसात
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बहुत दिनों पहले की बात है। बरसात का दिन था। मौसम बहुत खराब था। कई दिनों से लगातार बारिश हो रही थी। चारों तरफ पेड़-पौधें हरे-भरे दिख रहे थे। चिड़ियाँ पेडों पर बैठीं मानो कोई बारिश का गीत गा रहीं हो। बादल ऐसे झूम रहे थे जैसे बहुत खुश हो। हवाएँ भी मस्ती में चल रही थी जैसे कोई जश्न मना रही हो। बिजली भी कहाँ चुप रहने वाली थी, वह भी आके चमकने लगी। ऐसा लग रहा था, जैसे सब एक साथ कोई खेल खेल रहे हों। कोई किसी से कम नहीं था। अगर पानी तेज बरसता तो बिजली भी दोगुनी गति से चमकती और हवा भी तेजी से चलती।
ये नज़ारा गाँव में कई दिनों से चल रहा था। मोहन उसी गाँव में रहता था। बारिश की वजह से मोहन कई दिनों से बाहर खेलने नहीं गया था। तेज़ बारिश की वज़ह से विद्यालय भी बन्द था। मोहन घर पर ही अपनी दीदी के साथ पढ़ाई पूरी करता था।
बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। मोहन को दोस्तों के साथ खेलने का बहुत मन था, परन्तु घर पर सब ने मोहन को तेज बारिश की वजह से बाहर जाने से मना कर दिया था।
शाम का समय था। घर के सभी सदस्य अपने-अपने काम में व्यस्त थे। मोहन मौका पा कर खिड़की के रास्ते से बाहर आ गया और अपने दोस्तों को बुलाने का प्रयास करने लगा।
अभी मोहन कुछ ही दूर गया था कि अचानक बिजली के खंभे का तार टूटा और मोहन का पैर उस तार पर पड़ गया। मोहन को बहुत तेज करंट लगा। मोहन दर्द सह नहीं पाया। वह बहुत तेज चिल्लाया और बेहोश हो गया।
कुछ लोगों ने मोहन की चीख सुनी वे दौड़ कर तुरन्त वहाँ आये। इतने में मोहन के परिवार के लोग भी आ गये। फिर सभी लोग मोहन को हॉस्पीटल ले गये। ईश्वर की कृपा से मोहन को होश आ गया। जैसे ही मोहन को होश आया, सभी लोग खुश हो गये।
होश में आते ही मोहन ने अपने किये की माॅफ़ी मागते हुए भविष्य में ऐसा ना करने का संकल्प लिया। मोहन ने हाथ जोड़कर विनती की-,"अम्मी, पापा, दीदी! सब लोग मुझे माफ़ कर दीजिये। अब मैं आपकी सब बात मानूँगा। इस बार आप मुझे माफ़ कर दीजिये।"
सभी ने मोहन को माॅफ़ करके गले से लगा लिया।
शिक्षा
बड़े लोग जब हमें किसी काम के लिए रोकते हैं तो समझिए कि उसमें हमारा हित निहित है।
शमा परवीन, बहराइच (उ०प्र०)
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