| ब्लॉग प्रेषक: | स्नेहा सिंह |
| पद/पेशा: | लेखक |
| प्रेषण दिनांक: | 02-04-2023 |
| उम्र: | XX |
| पता: | लखनऊ |
| मोबाइल नंबर: | 9453749772 |
कोरी कल्पना
एक कवि की कोरी कल्पना को पूरा
सा करती हैं एक कविता ।।
मन,मस्तिष्क और कलम के खालीपन
को भावों से सुसज्जित सा करती हैं एक कविता ।।
जज़्बात बिखरते हैं जब
कागज़ की फर्श पर स्याही के रंग हो
अक्षर अक्षर संग मोतियों की माला जैसी पिरों सा जाती हैं एक कविता ।।
हर भाषा,हर देश की संस्कृति और सभ्यता का मिला जुला
भाग सा होती हैं एक कविता ।।
अनकहे,अनसुलझे शब्द विचार
का स्पष्टीकरण हैं एक कविता ।।
सुख दुख,दर्द और मरहम
को सांझा सा करती हैं एक कविता ।।
एक कवि की कोरी कल्पना को पूरा सा करती हैं एक कविता ।।
एक कविता ।।
❤️
स्नेहा की कलम के असरार
— आपको यह ब्लॉग पोस्ट भी प्रेरक लग सकता है।
नए ब्लॉग पोस्ट
25-07-2026
आइए न हमरा बिहार में।
धरना नहीं, महामेला! सड़क किनारे का वह मैदान आज केवल धूल-धक्कड़ का ढेर नहीं था, उसमें लोकतंत्र की सुराही छलक रही थी। चारों तरफ गोंदली के पत्तों जैसी चंचल भीड़। यह कोई गुस्सा या विरोध का अखाड़ा नहीं था, ई तो गाँव-जवार का महापरब था। दिल्ली-पंजाब वाले जिसे
Read More17-07-2026
धर्म क्या है ?
आस्था है ब्रह्मांड का अस्तित्व है धर्म जन्म के जीवन की दिशा दृष्टिकोण निर्धारण करने का मार्ग है या जन्म जीवन के सत्यार्थ बोध का सत्य है। धर्म ईश्वरीय सत्य का विज्ञान है या आचरण एव संस्कार निर्माण का पथ सिद्धांत है। सर्व प्रथम यह जानना आवश्यक है कि धर्म..
Read More18-06-2026
विक्षिप्त हमारी संवेदना।
गर्मी की एक चिलचिलाती सुबह थी। मैं रोज़ की तरह मोहल्ले की चाय की दुकान पर खड़ा चाय की चुस्कियाँ ले रहा था। दुकान पर लोगों की भीड़ थी, राजनीति पर बहस चल रही थी और हर कोई अपने-अपने ज्ञान का प्रदर्शन करने में व्यस्त था। तभी फटे-पुराने कपड़ों में एक विक्षिप्त
Read More10-06-2026
एक सफर -सौ तमाशे
एक सफर - सौ तमाशे मैं समय हूँ... रेलवे स्टेशन में लगे घड़ी का समय। आप मेरे समय को देख कर रेल के टाइम से आने का समय न मिलाए और न ही अपनी घड़ी को मिलाएं, मै रेलवे का समय हूं। मैंने राजाओं का उत्थान-पतन देखा है, साम्राज्यों को बनते-बिगड़ते देखा है, किंतु जो
Read More09-06-2026
नियुक्ति पत्र का महाभारत।
नियुक्ति पत्र का महाभारत। हमारे यहां शिक्षक की नियुक्ति अब नौकरी नहीं रही, यह तपस्या बन चुका है। पहले ऋषि-मुनि जंगल में बैठकर भगवान को प्रसन्न करते थे, आज अभ्यर्थी साइबर कैफे, कोचिंग और कोर्ट-कचहरी के बीच बैठकर नियुक्ति पत्र क के लिए आयोग को प्रसन्न करने
Read More